Water War भारत के इस कदम से पाकिस्तान हो जाएगा बर्बाद

ब्यूरो:-कश्मीर में जो कुछ हुआ था उसके बाद 140 करोड़ हिंदुस्तानियों का खून खौल रहा था हर कोई यह जान रहा था कि अब कुछ बड़ा होगा और अब भारत ने पाकिस्तान को असली चोट दी है एक ऐसी चोट जिसमें ना टैंक चलाया गया ना कोई गोलीबारी हुई न 2016जैसी सर्जिकल स्ट्राइक हुई और ना ही 2019 जैसी बालाकोट एयर स्ट्राइक, इस बार भारत ने वो युद्ध छेड़ा है जो खून तो नहीं बहाएगा पर पाकिस्तान को प्यास से झगझोर के रख देगा ओर नतीजा ये होगा कि पाकिस्तान में चूल्हे नहीं जलेंगे वहां की आवाम प्यासी तड़पने लगेंगे नौकरियां खत्म होने लगेगी, कारखाने बंद होने लगेंगे अस्पताल ठप हो जाएंगे। कराची, लाहौर जैसे शहर अंधेरे में डूब जाएंगे, सब्जियों के दाम असमान छूने लगेंगे, खेत सूखने लगेंगे किसान भूखे मरेंगे जनता सड़कों पर आ जाएगी, मौत गोली से नहीं प्यास से होगी।

भारत ने पाकिस्तान से ऐसे युद्ध की शुरुआत की है जहां खून तो नहीं बहेगा लेकिन मौत प्यास की तड़प से पाकिस्तान सूख के मर जायेगा क्योंकि भारत ने इस बार वाटर स्ट्राइक करने जा रहा है।

इतिहास में लिखा जायेगा 

भारत एक ऐसी वार करने जा रहा है जो इतिहास में किसी ने नहीं की होगी। ये एक ऐसा प्रहार है जो पाकिस्तान की रीढ़ तोड़ देगा।

आपको बता दे कि पहलगाम में जब हिंदुओं का पाकिस्तान समर्थक आतंकियों द्वारा नरसंहार किया गया तो यह भारत के सब्र का आखरी इम्तहान था ओर इसके बाद भारत ने वो फैसला लिया अथवा वो समझौता तोड़ा जिसे भारत ने मानवता के लिए तब भी निभाया जब 1965,1971 में भारत पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ।

जब 1993 में पाकिस्तान ने मुंबई में हमला करवाया जब 2001में पाकिस्तान ने संसद में हमला करवाया,2008 में 26/11 का नरसंहार हुआ, 2016 में उरी ओर 2019 में पुलवामा में हमारे जवानों पर हमला करवाया उसके बावजूद भी भारत ने जिस समझौते को निभाए रखा था परंतु इस बार भारत ने अपने सब्र के बांध को तोड़ दिया और उस बांध को रोक देने का फैसला किया जिससे पाकिस्तान को बूंद बूंद के लिए तड़पना पड़ेगा। ये कदम पाकिस्तान को अंधेरे में डाल देगा ओर उसे पूरी तरह से बर्बाद कर देगा।

आखिर क्या है सिंधु जल समझौता

सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियां जेहलम और चिनाब पाकिस्तान की जीवन रेखा है ये नदियां चार देशों से होकर गुजरती है और लगभग 21 करोड़ लोगों की जल आवश्यकताओं को पूरा करती है। सन 1947 से इसका विवाद शुरू हुआ था लेकिन भारत ने अपना जिगरा दिखाते हुए सन 1960 में पंडित नेहरू ने सिंधु जल समझौता किया जो पाकिस्तान के लिया बेहद फायदेमंद रहा पाकिस्तान को सिंधु जेहलम और चिनाब का 80% पानी मिला और भारत को रावी, ब्यास ओर सतलुज नदी का पानी मिला जो टोटल पानी का 20% था। ये समझौता पाकिस्तान के लिए जीवन रेखा की तरह है।

पाकिस्तान के लिए कैसे सिद्ध होगा विनाशकारी प्रभाव 

अब जब भारत ने ये सख्त कदम उठाया है तो पाकिस्तान पर इसके विनाशकारी प्रभाव पड़ेंगे वो कैसे चलिए जानते है।

दरअसल पाकिस्तान की 80%सिंचाई सिंधु अथवा उसकी सहायक नदियों पर निर्भर है। पाकिस्तान में खेती के लिए 93% पानी का प्रयोग यही से होता है और बिना पानी के सभी खेत नष्ट हो जाएंगे किसान बर्बाद हो जाएंगे इसका असर खेत खलियान के साथ साथ पाकिस्तान के बड़े शहरों जैसे कराची लाहौर ओर मुल्तान की जल आपूर्ति इन्हीं नदियों पर निर्भर है ओर जब पानी की कमी होगी तो लोग एक एक गिलास साफ पानी के तरसेंगे। पाकिस्तान अंधेरे में डूब जाएगा क्योंकि सिंधु बेसिक पर बने हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट पाकिस्तान की बिजली का प्रमुख स्तोत्र है पानी की कमी से बिजली का उत्पादन ठप हो जाएगा पाकिस्तान के बड़े शहर अंधेरे में डूब जाएंगे कारखाने बंद हो जाएंगे। आगे तेज गर्मी पड़ने वाली है जो असहनीय होगी बर्दाश्त से बाहर होगी। पाकिस्तान में वैसे भी बिजली संकट से जूझ रहा है

पाकिस्तान में पानी की कमी से खेती न होने पर सब्जियां अनाज की कीमतें आसमान छूने लगेंगी भुखमरी छा ने आशंका रहेगी। पाकिस्तान में हर जगह अस्थिरता देखने को मिलेगी। वहां की जनता सरकार के खिलाफ आंदोलन पर उतर आएगी। पाकिस्तान में बेरोजगारी चरम सीमा पर पहुंच सकती है।

भारत के इस कदम का कब दिखेगा असर 

आप सभी सोच रहे होंगे कि भारत के इस फैसले से पाकिस्तान तुरंत बर्बाद हो जाएगा परंतु ऐसा नहीं है। भारत का ये फैसला इतनी जल्दी पाकिस्तान पर असर नहीं डालेगा। सिंधु जल संधि टूटने से तत्काल पाकिस्तान को नुकसान देखने को नहीं मिलेगा। दरअसल सिंधु जेहलम चुनाव नदियों का पानी रोकने के लिए भारत को बड़े बांध बनाने की जरूरत पड़ेगी जिसके लिए अभी समय लगेगा। पाकिस्तान के अभी कई जलाशय है जिससे वह कृषि पानी अथवा बिजली की आपूर्ति कर सकता है।

क्यों लिया गया ये फैसला 

दरअसल भारत ने ये फैसला आतंकवाद के दृष्टिकोण से लिया है पर पाकिस्तान अपनी छाती पीटने के लिए विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय समुदायों के पास जाएगा, मानवता की दुहाई देगा आवाम को बचाने की अपील करेगा और अंतर्राष्ट्रीय समुदायों के जरिए भारत पर दबाव बनाने की कोशिश करेगा। हालांकि भारत ने जब ये फैसला लिया होगा तब शायद वह इसके परिणामों से वाकिफ नहीं होंगे कि क्या हो सकता है।

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